गरीबी और असमान डिजिटल पहुँच बन रहा है छात्रों के लिए चुनौती

ऑनलाइन शिक्षा और डिजीटल असमानता: क्या हर विद्यार्थी डिजिटल युग के लिए तैयार है

आपदा में अवसर” ये बात तो आज कल बहुत आम हो गई है। परंतु कुछ समय पहले जब कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था, तब ये बात पूर्णरूप से चरितार्थ हो गई कि हर विपत्ति अपने साथ कोई न कोई अवसर ज़रूर लाती है। सेवाओं का व्यापक तौर से डिजिटल माध्यम से जुड़ना इसका जीवित उदहारण है। वैसे तो भारत में 1 जुलाई 2015 को ही प्रधानमंत्री द्वारा डिजिटल इंडिया मिशन की शुरुआत की गई जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हाइस्पीड इंटरनेट की सुविधा देना था। इसके माध्यम से इंटरनेट से जुड़ी सारी सुविधाएं सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाना था।

डिजिटल दुनिया का महत्व:
कोरोना महामारी के बाद डिजिटल इंडिया योजना का महत्व अनेक क्षेत्रों में देखा जा सकता है जिसमें शिक्षा एक महत्वपूर्ण अंग है। आज कमोबेश हर शिक्षा-व्यवस्था इंटरने से जुड़ गई है। प्राइमरी स्कूल से लेकर डिग्री कॉलेज तक छोटे कोचिंग संस्थान से ले कर नीट, जेईई, बीपीएससी और यूपीएससी तक के कोचिंग देने वाले सारे संस्थानो ने अपने शिक्षण का दायरा क्लास रूम से बढ़ाते हुए इंटरनेट के माध्यम से हर उस छात्र/छात्राओं तक पहुंचा दिया है जो वहाँ तक पहुँचने मैं असमर्थ थे।

क्या डिजिटल दुनिया तक है सबकी पहुँच:
शिक्षा के क्षेत्र में डिजिट इंडिया किसी वरदान से कम नहीं ,परंतु इसके साथ समस्या ये है कि ये वरदान हर किसी को मयस्सर नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह गरीबी और हाइस्पीड इंटरनेट की उपलब्धता ना होना है। इंटरनेट आज हर व्यक्ति की मूलभूत ज़रूरत बन गई है। हर क्षेत्र में इसकी उपयोगिता को चिन्हित किया जा सकता है, जिसमें शिक्षा एक महत्वपूर्ण अंग है। आज हर स्टूडेंट् शिक्षा के लिए किसी न किसी माध्यम से इंटरनेट का उपयोग कर रहा है।

कितने स्कूलों में है इंटरनेट:
यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन के अनुसार भारत में अब भी लगभग 78 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है। जबकि उच्च एवं उच्चतर शिक्षा में ये आंकड़े और कम हो जाते हैं। वहीं UNESCO की स्टेट एजुकेशन रिपोर्ट 2021 के अनुसार भारत में केवल 19 प्रतिशत स्कूलों में ही इंटरनेट की सविधा है ,वहीं आंकड़ों बताते हैं कि शहरी क्षेत्रों के 42 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 18 प्रतिशत स्कूलों में ही इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध है।

गरीबी ने किया लोगों को इंटरनेट से दूर:
शहरी क्षेत्रों में जहाँ हाईस्पीड इंटरनेट तो उपलब्ध है, वहाँ गरीबी किसी अभिशाप के जैसी छात्रों के गले पड़ी हुई है। छात्रों अथवा उनके परिजन के पास इतने पैसे नहीं है जिससे वो उन्हें वो सभी संसाधन मुहैया करवा सकें, जिससे वो ऑनलाइन शिक्षा का पूरी तरह फायदा उठा सकें। गरीबी के कारण जहाँ वह महंगे उपकरण खरीदने में असमर्थ होते , वहीं महंगा होता इंटरनेट और उन सब पर कोचिंग संस्थानों की आसमान छूती फीस। जो किसी भी माध्यमवर्गीय या उससे नीचे आने वाले किसी भी परिवार के लिए दिव्य स्वप्न जैसा हो जाता है। वो चाह कर भी डिजिटल इंडिया के अवसर का लाभ नही उठा पाते।

जबकि गाँव में दृश्य कुछ और है, वहाँ गरीबी तो है ही दूसरी तरफ़ हाइस्पीड इंटरनेट की पहुंच भी नहीं। देश के कुछ इलाक़े आज भी इंटरनेट की पहुँच से दूर हैं, जहाँ इंटरनेट की पहुँच है भी तो वहाँ लोगों को 2G या 3G स्पीड ही मिल रहा ,उसपर कोढ़ में खाज जैसे महंगाई । ऐसे में इंटरनेट के माध्यम से शिक्षा पाना अब भी बहुत से लोगों के लिए बस स्वप्न मात्र है । इसलिये इस बात को कहने में कोई हिचक नहीं के डिजिट इंडिया में हर स्टूडेंट के पास इंटरने की उचित सुविधा उपलब्ध नहीं है।

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