Report- Nazish Mahtab
पटना: राजधानी पटना के दानापुर अंचल स्थित मौजा धनौत में ज़मीन विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें भ्रष्टाचार और जालसाजी का खेल उजागर हुआ है। वर्ष 1997 और 1998 में खरीदी गई दो प्लॉटों पर पिछले 28 वर्षों से कब्ज़ा है, और वर्ष 2010 से वहां श्री हरि आई.टी.आई संचालित हो रहा है। इसके बावजूद, कथित तौर पर भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से बिना किसी जांच-पड़ताल के, जाली बंटवारा नामे के आधार पर जमीन को अन्य पक्ष के नाम दाखिल-खारिज कर दिया गया।
मुकेश कुमार बताते हैं कि “ मैं मुकेश कुमार पता आनंदपुरी बोरींग कैनाल रोड पटना का निवासी हूँ। मामला वर्ष 2024 का है। दानापुर अंचल स्थित मौजा धनौत मे मेरी माँ के द्वारा वर्ष 1997 एवं 1998 मे दो प्लौट खरीदी गई जो विगत 28 वर्षों से मेरे दखल-कब्जे में है, वर्ष 2010 से उस पर श्री हरि आई०टी०आई अभी तक संचालित है।”
फर्जी बंटवारा नामे में मृत घोषित कर दिया गया मालिक
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जालसाजों द्वारा फर्जी बंटवारा नामा तैयार किया गया, जिसमें जमीन के असली मालिक को मृत घोषित कर उन्हें अभियुक्तों का दिवंगत दादा बना दिया गया। यह स्पष्ट रूप से एक सुनियोजित षड्यंत्र है, जिसमें सरकारी अधिकारियों की भूमिका संदेहास्पद है।
आरोप है कि राजस्व कर्मचारी अश्लोक कुमार, राजस्व अधिकारी शहला बारी और अंचल अधिकारी अमृत राज बंधु ने मोटी रिश्वत लेकर यह गैर-कानूनी कार्रवाई की और जमीन को जबरन अभियुक्तों के पक्ष में कर दिया।
मुकेश आगे बताते हैं कि “भू-लगान की रसीद भी 2023-24 तक कट रही थी।, जिसे तत्कालीन भ्रष्ट अधिकारीयो 1. राजस्व कर्मचारी अश्लोक कुमार, 2. राजस्व अधिकारी शहला बारी एवं 3. अंचल अधिकारी अमृत राज बंधु ने सिर्फ मोटी घुस लेकर बिना कोई जाँच-पड़ताल या मुझे कोई सूचना दिये मेरी उपरोक्त जमीन को अभियुक्तो द्वारा बनाए गए जाली व फर्जी बंटवारा नामा के आधार पर अभियुक्तो के पक्ष में दाखिल खारीज कर दिया। बटवारा नामा मे मुझे मृत घोषित कर मुझे अभियुक्तों का स्व० दादा बना दिया। मामले की जानकारी होते ही मै सक्षम न्यायालय में केस किया (ADM पटना के न्यायालय) मामला लंबित है। साथ ही सभी अभियुक्तो के खिलाफ पटना सिविल कोर्ट में भी केस किया। जिस पर माननीय न्यायालय ने धारा 406, 420, एवं 465 के तहत वारेंट जारी किया है.”
साक्ष्यों के बावजूद न्याय की लड़ाई जारी
ज़मीन मालिक को जब इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली, तो उन्होंने पटना के ADM न्यायालय में मामला दर्ज किया, जहां अभी सुनवाई चल रही है। इसके अलावा, पटना सिविल कोर्ट में भी अभियुक्तों के खिलाफ मामला दायर किया गया, जिसमें न्यायालय ने धारा 406, 420 और 465 के तहत वारंट जारी कर दिया है।
इसके बावजूद, अभी तक पीड़ित को न्याय नहीं मिल पाया है। जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिदेशक, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री तक लिखित रूप में गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही।
अप्रैल 2025 में फिर कट सकती है ज़मीन की रसीद!
सबसे गंभीर चिंता यह है कि मामले की सुनवाई के बावजूद, प्रशासन द्वारा अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है। अप्रैल 2025 में फिर से भू-लगान की रसीद कटने का समय आ रहा है, जिससे आशंका है कि अभियुक्तों के पक्ष में दोबारा ज़मीन का वैधकरण हो सकता है।
सरकार से न्याय की गुहार
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, बल्कि उस सिस्टम की पोल खोलता है, जहां भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के ज़रिए नागरिकों की संपत्ति पर जबरन कब्जा किया जा सकता है। न्यायालय में मामला लंबित रहने के बावजूद, अगर अभियुक्तों के पक्ष में ज़मीन की रसीद काटी जाती है, तो यह एक बड़ी प्रशासनिक विफलता होगी।
सरकार से मांग की जा रही है कि जब तक न्यायालय इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं सुना देता, अभियुक्तों के पक्ष में भू-लगान की रसीद न काटी जाए और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है। क्या इस भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया जाएगा या फिर एक आम नागरिक को न्याय के लिए सालों तक संघर्ष करना पड़ेगा?
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